भोजन शृंखला क्या है?HealthPlanet

Posted on Mon 5th Dec 2022 : 11:59

भोजन श्रृंखला

किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र में जीवधारियों का वह अनुक्रम जिसमें ऊर्जा का हस्तान्तरण होता रहता है, भोजन श्रृंखला कहलाती है। एक भोजन श्रृंखला में उत्पादक मुख्यतः हरे पौधे जो भोजन स्वयं तैयार करते हैं तथा उपभोक्ता मुख्यतः पशु जो उत्पादकों पर निर्भर करते हैं, होते हैं। उपभोक्ताओं को कई श्रेणियों में विभक्त किया जा सकता है, (1) प्रथम श्रेणी उपभोक्ता (शाकाहारी तथा) (2) द्वितीय श्रेणी उपभोक्ता (शाकाहारी तथा मांसाहारी)। भोजन श्रृंखला में अपघटक भी होते हैं जो मृत जीव एवं अपशिष्टों का भक्षण करते हैं। सभी घटक एक स्थाई परितंत्र में साथ– साथ काम करते हैं।

प्राणी जगत् के लिए ऊर्जा का मूल स्त्रोत सूर्य है। इससे अपार मात्रा में ऊर्जा पृथ्वी पर आती है जो वस्तुतः प्रकाश एवं ऊष्मा के रूप में होती है । इसका सीधा– सीधा उपयोग जन्तुओं और वनस्पतियों द्वारा नहीं हो पाता (कुछ अपवाद बैक्टीरिया को छोड़कर), अतः यह हरे पोधों द्वारा क्लोरोफिल की सहायता से ग्रहण कर ली जाती है तथा यह पौधे उस ऊर्जा को जल एवं कार्बोहाइड्रेट्स में परिवर्तित कर देते हैं। इसी कारण इन पौधों को उत्पादक कहा जाता है । उत्पादक स्वयं अपना भोजन तैयार करते हैं।

यहाँ यह बताना जानकारी हेतु उचित ही है कि सूर्य ऊर्जा की जितनी मात्रा हरे पौधों से टकराती है उसका 98% भाग परावर्तित हो जाता है। शेष 2% में से भी सिर्फ आधे का ही उपयोग यह हरी वनस्पतियाँ कर पाती हैं, अर्थात् सिर्फ 1% ऊर्जा का ही उपयोग होता है ।

अब यह हरी वनस्पतियाँ जिनका भोजन बनती हैं, उन्हें उपभोक्ता कहा जाता है तथा निःसन्देह यह शाकाहारी होते हैं। इन्हें प्रथम श्रेणी का उपभोक्ता' भी कहा जाता है। अब यह प्रक्रिया किसी ‘पोषी संरचना' का एक स्तर (भाग) बन गई है।

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